रामायण के बाद रामानंद सागर को लड़ना पड़ी थी 10 साल क़ानूनी लड़ाई, राम का इस वजह से ख़त्म हुआ करियर!

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दोस्तों देश में कोरोना महामारी के संकट के चलते देश में लॉकडाउन के दौरान किसी भी शो या फिल्म की शूटिंग नहीं चल रही है। इस वजह से दूरदर्शन नेशनल चैनल पर बीते ज़माने के तमाम शोज फिर से इस चैनल पर प्रसारित किए जा रहे हैं। 33 साल बाद भी रामानंद सागर की रामायण को लेकर लोगों में खास उत्साह है। भारतीय टीवी के इतिहास में दर्जनों रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले इस शो की शुरुआत काफी मुश्किलों भरी रही। शो के निर्देशक रामानंद सागर से लेकर विभिन्न कलाकारों को भी तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ा। तब जाकर ये पॉपुलर धारावाहिक लोगो तक पहुंचा था।

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रामानंद के इंतजार का सागर रामानंद सागर को रामायण का प्रसारण शुरू करने में करीब दो साल का वक्त लग गया। इसके लिए उन्होंने दूरदर्शन और सूचना प्रसारण मंत्रालय में काफी चक्कर भी लगाए थे। उन्हें इस सीरियल को बनाने की अनुमति तो 1985 में मिल गई थी लेकिन इसका प्रसारण 25 जनवरी 1987 से शुरू हो सका। दरअसल इसके शुरुआती तीन पायलट एपिसोड मंत्रालय की तरफ से नकार दिए गए थे। इससे पहले कभी इस तरह का प्रसारण नहीं हुआ था इस वजह से सभी आला अधिकारी काफी सर्तक थे। उन्होंने शो से जुड़ी अपनी कई आपत्तियां दर्ज कराई जिसमें सीता का किरदार निभा रहीं अभिनेत्री दीपिका चिखलिया के वेशभूषा प्रमुख रही।

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रविवार सुबह मचती अफरातफरी कोई भी धारावाहिक जब बनता है तो इसे बनाने वाली कंपनी के साथ साथ जिस चैनल पर ये प्रसारित होता है, उसकी क्रिएटिव टीम भी स्क्रिप्ट लिखे जाने से लेकर शूटिंग और एडीटिंग तक साथ लगी रहती है। लेकिन  पहले के समय में ऐसा नहीं होता था पहले निर्माता धारावाहिक एपीसोड बनाकर भेज देता था और चैनल को अगर कोई आपत्ति होती थी तो निर्माता को वह हिस्सा फिर से शूट करना पड़ता था। ऐसा ही कुछ रामायण के साथ भी होता था।

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बता दे की रामानंद सागर अपना एपीसोड भेज देते। दूरदर्शन वाले अपने हिसाब से उसे देखते और फिर करेक्शन बताते। उस समय इंटरनेट की सुविधा नहीं थी , बस टेप ही आती जाती थी। ऐसे में कई कई बार रामायण का फाइनल कैसेट दूरदर्शन तक शो शुरू होने के ठीक पहले ही पहुंच पाता था।  उन दिनों की बात है जब दूरदर्शन हर धारावाहिक को 13 एपिसोड या फिर इसके गुणक में अनुमति देता था और तब धारावाहिकों की कहानी टीआरपी बढ़ जाने के बाद भी खींची नहीं जाती थी।

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बता दे की रामायण को 78 एपिसोड्स की मंजूरी मिली। और, जब ये हिट हो गया तो लोगों ने लव कुश की कहानी दिखाए जाने की मांग शुरू कर दी। रामानंद सागर इसके लिए तैयार नहीं थे। उनके अनुसार अगर वह लव कुश की कहानी बनाते हैं तो यह एक काल्पनिक कथा होगी। और हुआ भी यही, इस कहानी के प्रसारित होने के बाद शो से जुड़े कई तरह के विवाद सामने आए। रामानंद सागर को इनके लिए 10 साल तक कोर्ट में केस भी लड़ने पड़े। रामायण में निभाए राम के किरदार से अरुण गोविल को पूरे देश में शोहरत और इज्जत तो खूब मिली लेकिन यह किरदार लोगों के जहन में इस कदर से बैठ गया कि लोग अरुण गोविल में सिर्फ श्रीराम की छवि ही देखने लगे।

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अरुण गोविल कहते हैं, ‘रामायण के बाद मैं सिनेमा में वापसी करना चाहता था लेकिन राम के तौर पर मेरी छवि ऐसी बन गई कि निर्माता कोई दूसरा काम मुझे देते ही नहीं थे। उन्हें लगता था कि अब मैं कमर्शियल फिल्मों के लिए उपयुक्त नहीं रहा हूं। यह मेरे करियर का सबसे बड़ा नकारात्मक पक्ष बन गया। मैंने बाद में कुछ टीवी शोज भी किए लेकिन जब भी मैं कुछ नया करता तो लोग मुझे नकार देते और कहते कि अरे, रामजी क्या कर रहे हैं।’