अपनी को-स्टार प्रेक्षा की मौत से दुःखी हो कर करण कुंद्रा ने कही ये बड़ी बात, बोले- ये बहुत दुखद है!

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टीवी ऐक्‍ट्रेस प्रेक्षा मेहता की मौत ने इंडस्‍ट्री को झकझोड़ कर रख दिया है। दोस्तों महामारी कोरोना के चले पुरे देश में लॉकडाउन की वजह से लोग के काम बंद पड़े है और सभी अपने अपने घरो में कैद है, ऐसे में मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात को टीवी एक्ट्रेस प्रेक्षा मेहता ने फांसी लगाकर जान दे दी। आर्थ‍िक तंगी और काम नहीं मिलने की वजह से आत्‍महत्‍या की है। पुलिस को प्रेक्षा का सूइसाइड नोट भी मिला है।

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वही एक्ट्रेस के को-स्‍टार करण कुंद्रा अपनी दोस्‍त को खोने के कारण गम में डूबे हुए हैं। उन्‍होंने सोशल मीडिया पर प्रेक्षा की मौत से जुड़ी एक बात लिखी है, जिसे हम सभी को पढ़ना और समझना चाहिए। करण कुंद्रा ने ट्वीट किया, ”सबसे बुरा होता है सपनों का मर जाना।’ एक और टीवी एक्टर ने खुदकुशी कर ली। उसने अपने इंस्टाग्राम पर लास्ट में यही पोस्ट किया था। #prekshamehta ये बहुत दुखद है। तुम बहुत यंग थी। तुम्हारे सामने पूरी जिंदगी थी! हमें मेंटल हेल्थ के बारे में बात करने की जरूरत है।’

अपनी को-स्टार प्रेक्षा की मौत से दुःखी हो कर करण कुंद्रा ने कही ये बड़ी बात, बोले- ये बहुत दुखद है! 10 करण ने एक अन्‍य ट्वीट में लिखा, ‘उसका इंस्‍टाग्राम बिल्‍कुल सामान्‍य है। यह बतलाता है कि हमें कठिन समय में हमारे आसपास के लोगों की देखभाल करने की कितनी आवश्यकता है। RIP little one. हम तुम्हारे लिए प्रार्थना करेंगे! यह भी गुजर जाएगा!’ करण ने अपने इन ट्वीट्स को इंस्टाग्राम भी स्‍क्रीनशॉट के साथ पोस्‍ट किया। उन्‍होंने इंस्‍टा पर लिखा, ‘यह मुश्किल दौर है। लेकिन अच्छा वक्‍त भी आएगा। यह लॉकडाउन बेहद अजीब है, इसमें चिंता है, नकारात्मकता है। लेकिन हमें मजबूत रहने की जरूरत है।’

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प्रेक्षा मेहता के पिता के मुताबिक, लॉकडाउन में ऐक्‍ट्रेस अपने घर आ गई थी। पुलिस ने प्रेक्षा का जो सुइसाइड नोट शेयर किया है, उसमें ऐक्‍ट्रेस का दर्द छलकता है। वह लिखती हैं, ‘मेरे टूटे हुए सपनों ने मेरे कॉन्‍फ‍िडेंस का दम तोड़ दिया है। मैं मरे हुए सपनों के साथ नहीं जी सकती। इन नेगेटिविटी के साथ रहना मुश्‍क‍िल है। पिछले एक साल से मैंने बहुत कोश‍िश की। अब मैं थक गई हूं।’

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बता दे की टीवी सीरियल के अलावा प्रेक्षा थिएटर के लिए भी काम करती थी। थिएटर में उसकी शुरुआत अभिजीत वाडकर, संतोष रेगे और नगेंद्र सिंह राठौर के नाट्य ग्रुप ‘ड्रामा फैक्टरी’ से हुई। मंटो का लिखा नाटक ‘खोल दो’ उनका पहला प्ले था। इसको मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स के बाद वो ‘खूबसूरत बहू, बूंदें, राक्षस, प्रतिबिंबित, पार्टनर्स, हां, थ्रिल, अधूरी औरत’ जैसे नाटकों में काम कर चुकी थीं। उन्हें अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय नाट्य उत्सवों में फर्स्ट प्राइज मिला था। एकल नाट्य ‘सड़क के किनारे” में जानदार अभिनय के लिए भी उन्होंने अवॉर्ड जीता था।