सोनू सूद को उनकी मां चिट्ठियों में लिखा करती थीं ये बातें, नागपुर के कॉलेज से की है इंजीनियरिंग!

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दोस्तों कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन में सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना प्रवासी मजदूरों का करना पड़ रहा है। ऐसी मुश्किल की घड़ी में सोनू ने मजदूरों के मसीहा बनकर उनको उनके घरो तक पहुंचने का काम किया हैं। आइए जानते हैं उनके कॉलेज, स्कूल और करियर से जुड़ी खास बातें। जब कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन की घोषणा हुई तब प्रवासी मजदूर शहरों से पैदल ही परिवार के साथ अपने गांव के लिए निकल पड़े। इस दौरान कोई भी वाहन नहीं चल रहा था।

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ऐसे में सोनू सूद ने इन सभी मजदूरों को अपने घरों तक पहुंचाने का जिम्मा उठाया। अब वह खुद ही बसें चलवा कर इन मजदूरों को उनके गांव तक पहुंचा रहे हैं। ट्विटर पर लगातार लोगों को रिप्लाई कर उन्हें घर पहुंचाने की मुहिम में लगे हुए हैं।ट्विटर पर अरविंद पांडे नाम के एक यूजर ने सोनू सूद के पुराने रेलवे पास की तस्वीर शेयर करते हुए कहा, ‘जिसने सच में संघर्ष किया हो उसे दूसरे लोगों की पीड़ा समझ में आती है। सोनू सूद कभी 420 रुपये वाली लोकल का पास लेकर सफर किया करते थे। सोनू सूद ने ट्वीट करते हुए लिखा ‘Life is a full circle’।

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सोनू सूद का जन्म 30 जुलाई 1973 को मोगा, पंजाब में हुआ था। उन्होंने 1996 में सोनाली से शादी की। उनके दो बेटे ईशांत और अयान हैं। आज सोनू सूद भारतीय फिल्मों में बतौर अभिनेता और निर्माता के तौर पर जाने जाते हैं, लेकिन आपको बता दें कि वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं। उन्होंने यशवंतराव चव्हाण कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (YCCE), नागपुर से डिग्री ली है। साथ ही अपने ट्विटर अकाउंट पर “Engineer/actor/producer from Moga” मेंशन किया हुआ है।

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बता दे की सोनू सूद अपनी मां के काफी करीब थे, अब वह इस दुनिया में नहीं रहीं. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘मेरी  मां कॉलेज में प्रोफेसर थीं। मेरी स्कूल के कई टीचर्स मेरी मां के स्टूडेंट्स रह चुके थे। मैं बचपन में काफी शरारती था। ऐसे में अक्सर टीचर्स मुझसे कहते थे, तुम्हारी मां प्रोफेसर हैं और तुम इतने शरारती हो’।

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सोनू ने बताया, ‘जब भी मैं स्कूल में कोई शरारत करता था तो मुझे डर रहता था कि ये बातें मेरी मां तक न पहुंच जाएं, क्योंकि मेरी मां काफी सख्त स्वभाव की थीं, लेकिन सभी टीचर्स को मुझसे खास लगाव था, ऐसे में मेरी शरारत की शिकायत मां तक नहीं पहुंच पाती थी।’ सोनू ने बताया, ‘कॉलेज लाइफ में ज्यादा शरारत करने का मौका नहीं मिला। मेरा एडमिशन डीएम कॉलेज में हुआ, यहां मेरी मां अंग्रेजी की प्रोफेसर थीं। ऐसे में मुझे शरीफ बनकर ही रहना पड़ता था और पढ़ाई करनी पड़ती थी। इसके बाद मैं नागपुर गया और वहां से इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की’।

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इंजीनियरिंग के दौरान ही सोनू ने मॉडलिंग शुरू कर दी थी। सोनू ने बताया, उस दौरान परिवार का पूरा सपोर्ट मिला था। जब मैं पंजाब से इंजीनियरिंग की डिग्री लेने नागपुर के लिए निकला तो मां ने कहा था 4 साल का कोर्स है। हम इंतजार करेंगे कि ये 4 साल जल्दी ही बीत जाएं। ये पहली बार था जब मैं घर से दूर गया था। जब मैंने इंजीनियरिंग की डिग्री ली, उसके बाद मैंने घरवालों को बताया कि मैं एक्टर बनना चाहता हूं और मुंबई जाना चाहता हूं। ऐसे में घरवालों ने पूरा सपोर्ट किया। मां ने कहा, जा रहे हो तो अब एक्टर बन कर ही वापस लौटना।’

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‘जब मैं मुंबई आया तो कोई मुझे नहीं जानता था। यहां काम मिलना आसान नहीं था। मेरा आत्मविश्वास डगमगा जाता था, लेकिन उस दौरान मेरी मां मुझे चिट्ठियां लिखा करती थी। वह उनमें कविताएं लिखा करती थीं, जिसे पढ़कर मैं मोटिवेट होता था।’ ‘मैं अक्सर मां से कहता था, हम दिन में कई बात करते हैं, इन दिनों चिट्ठियों का फैशन नहीं है। आप चिट्ठियां क्यों लिखती हैं? मां मुझसे कहती थी, जब मैं नहीं रहूंगी, तब तुम्हें ये चिट्ठियां मेरी याद दिलाएंगी, जब भी तुम डिमोटिवेट महसूस करोगे, ये चिट्ठियां तुम्हें मोटिवेट करेंगी।’ सोनू ने बताया आज भी वह सभी चिट्ठियां मैंने अमानत की तरह संभाल कर रखी हैं।