कनाडा में पढ़ाई करने वाले छात्रों को वहां पैसे कमाने में होती है बहुत मुश्किल, कम पैसो में करना पड़ता है अधिक काम!

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दोस्तों पंजाब से लेकर कनाडा तक के छात्रों की जिंदगी आसान नहीं है। इन छात्रों को बहुत मेहनत करनी पड़ती है। कनाडा की एक शिक्षिका ने अपने छात्रों की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए कहा है कि ये छात्र सबसे होनहार हैं। शिक्षक लिखता है कि वह अपने सबसे होनहार छात्रों में से एक है, जो 12 घंटे की शिफ्ट में काम करता है, आधी रात से सुबह 7 बजे तक काम करता है और फिर घंटो बस की सवारी के लिए कॉलेज आता है।

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बता दे की पंजाब में जहां नशीले पदार्थों का चलन है, वहां बाहर जाने का चलन भी सबसे ऊपर है और अगर इन दोनों प्रवृत्तियों के पीछे एक सामान्य कारण है, तो वह है बेरोजगारी और अविश्वसनीय भविष्य। बेहतर भविष्य के सपने लेकर चलता यह युवक कभी चिंता किए बिना नहीं सोता। इन ऊर्जावान युवाओं की असली कहानी बयां करने वाली ये तस्वीरें खूब शेयर की जा रही हैं। कई छात्र जो कनाडा में गलत तरिके से आते हैं। कनाडा सरकार विदेशी छात्रों को पढ़ाई के अलावा सप्ताह में केवल 20 घंटे काम करने की अनुमति देती है। लेकिन फीस वसूलने के चक्कर में 20 घंटे के अलावा बहुत कम पैसे में ज्यादातर छात्र दो नंबर पर वहां ड्यूटी पर हैं।

कनाडा में पढ़ाई करने वाले छात्रों को वहां पैसे कमाने में होती है बहुत मुश्किल, कम पैसो में करना पड़ता है अधिक काम! 12 कनाडा में पढ़ाई करने वाले छात्रों को वहां पैसे कमाने में होती है बहुत मुश्किल, कम पैसो में करना पड़ता है अधिक काम! 13

एक बार माता-पिता अपने बच्चों को पैसे लगाकर विदेश में पढ़ाई के लिए भेजते हैं, लेकिन इन छात्रों को वहां जाने के अलावा रहने और खाने की लागत को पूरा करने के लिए होटल, स्टोर आदि में जरूरत से ज्यादा काम करना पड़ता है। वहां बैठे लोग इन छात्रों की मजबूरी का फायदा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं और आधे वेतन पर इन छात्रों से ज्यादा काम कराया जा रहा है। विदेशों में पढ़ाई का चलन पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है।

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कनाडा में पढ़ाई करने वाले छात्रों को वहां पैसे कमाने में होती है बहुत मुश्किल, कम पैसो में करना पड़ता है अधिक काम! 15 एक अनुमान के मुताबिक, हर साल करीब 4.43 मिलियन लोग दूसरे देश में पढ़ने के लिए अपना देश छोड़ देते हैं।ज्यादातर विदेशी छात्र पढ़ने के लिए ऑस्ट्रेलिया जाते हैं। इसके बाद ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, एनडी, न्यूजीलैंड और आरआईए ऑस्ट्रिया का स्थान है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विदेश जाने वाले छात्रों में से आधे एशियाई हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था के इस युग में, बहुराष्ट्रीय कंपनियां ऐसे लोगों को पसंद करती हैं जो विभिन्न देशों में काम कर सकें। कई भाषाएं बोलें, विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के साथ संवाद करें, अलग-अलग समय क्षेत्रों में काम करें।