पैरालिसिस अटैक के बाद दवाइयों तक के पैसे नहीं चुका पा रहा एक्टर, अब ड्राइवर से पैसे मांगने को हुआ मजबूर !

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टीवी शो ‘ससुराल सिमर का’ में काम कर चुके एक्टर आशीष राय को 21 जनवरी को पैरालिसिस (लकवा) अटैक के बाद अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था। तब से अब तक करीब 1 महीना होने को आया है, लेकिन एक्टर की दिक्कतें जस की तस बनी हुई हैं। आशीष न केवल फिजिकली बल्कि फाइनेंशियली भी काफी परेशान हैं। आशीष ने पैरालिसिस अटैक के बाद की लाइफ और दूसरी दिक्कतों के बारे में खुलकर बात की। 21 जनवरी को, मैं CID शो का प्लॉट शूट करने वाला था। मेरी सुबह की शिफ्ट थी। जब मैं उठा, तो महसूस किया कि शरीर का दाहिना हिस्सा काम नहीं कर रहा है। खासकर मेरा दायां हाथ। मैंने फौरन अपने ड्राइवर को फोन किया और वह मुझे अस्पताल ले गया। वहां, मुझे बताया गया कि पैरालिसिस अटैक है।

आशीष के मुताबिक, बैंक ने मेरे चेक को सस्पेंड कर दिया है, क्योंकि मैं अब उस पर साइन (हस्ताक्षर) नहीं कर पा रहा हूं। जाहिर है, मैंने पहले दाहिने हाथ से साइन किए थे लेकिन अब वह हाथ लकवाग्रस्त है। इसकी वजह से मुझे काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। मेरे खाते में पैसा होने के बावजूद, मैं बिलों का पेमेंट नहीं कर पा रहा हूं। मेरे पास ज्यादा कैश नहीं है। जो कैश था उसका डेली लाइफ में यूज कर लिया। अस्पताल और फिजियोथेरेपिस्ट के बिल काफी ज्यादा हैं लेकिन मैं चेक के बिना पैसा निकालने को भी मजबूर हूं। आशीष ने कहा, सरकार से मेरी रिक्वेस्ट है कि वो इस मैटर पर ध्यान दे। बैंक अधिकारियों ने भी मदद नहीं की और मुझे बार-बार फिंगर प्रिंट के लिए बुलाया। लेकिन अब भी मामला अटका हुआ है।

आशीष ने कहा- ”मुझे अपना बिजली बिल 1300 रुपए देना है और इसके लिए मुझे अपने ड्राइवर से पैसे लेना पड़ रहे हैं। मेरे लिए पैरालिसिस अटैक से कहीं ज्यादा दर्दनाक ये बात है कि मुझे दूसरों पर डिपेंड होना पड़ रहा है। शुक्र है, मुझे अस्पताल के बिलों के भुगतान के लिए CINTAA (सिने एंड टेलिविजन आर्टिस्ट एसोसिएशन) से 50,000 रुपए की मदद मिल गई। 

ईमानदारी से कहूं, तो इस घटना के बाद मुझे सही उम्र में शादी नहीं करने का अफसोस है। मैं युवा और बेवकूफ था। आज, मेरे पास बात करने के लिए कोई नहीं है। जब मेरे साथ यह दुखद घटना घटी, तो मेरी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। उस समय कोई भी मौजूद नहीं था। बेशक, मैंने महसूस किया है कि मुझे सही समय पर सही फैसला लेना चाहिए था। लेकिन अब इसके लिए बहुत देर हो चुकी है। अब मैंने जो कुछ भी तय किया है वह ये है कि जीवन के इस बुरे दौर से बाहर आना है और एक अच्छा इंसान बनना है। मैं काम को लिमिटेड करूंगा और अपनी खुशी पर ज्यादा फोकस करूंगा।

मैं इस अटैक का सामना करने के लिए बहादुर बनने की कोशिश कर रहा हूं। इम्प्रूवमेंट के लिए रेगुलरली फिजियोथेरेपिस्ट के पास जा रहा हूं लेकिन स्थिति में बहुत सुधार नहीं हुआ है। उम्मीद है, जल्द ठीक होऊंगा। इस अटैक से उबरना बहुत कठिन है। मैं अपने शरीर के दाएं हिस्से वाले अंगों का इस्तेमाल करने में असमर्थ हूं। मैं व्हीलचेयर से नहीं उठ सकता। यह बहुत दर्दनाक है। लेकिन मैंने खुद से वादा किया है कि मैं अंत तक हार नहीं मानूंगा। मैं जीवन के इस बुरे दौर से लड़ूंगा और फिर से अपने पैरों पर खड़ा होकर दिखाऊंगा।

मुंबई में मेरी फैमिली का कोई नहीं है। मेरी एक बहन है, जो कोलकाता में रहती है। जब यह खबर मीडिया में आई, तो कुछ थिएटर के दोस्तों और इंडस्ट्री के कुछ लोगों ने मेरी बहन से कॉन्टैक्ट करवाने में मेरी मदद की। उन्हें फेसबुक से उसका नंबर मिला तब जाकर उसे मेरे पैरालिसिस अटैक के बारे में पता चला। वह तुरंत मुंबई आ गई। जैसे ही मुझे अस्पताल से छुट्टी मिली, वह मुझे कोलकता ले गई और मैं अब भी रिकवरी के लिए यहीं हूं।