इस राजा की मौत की प्लेन क्रैश में मौत में हुई थी , लॉकेट से हुई डेड बॉडी की पहचान

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ग्वालियर। यूपी में कानपुर के पास एक हवाई दुर्घटना में 15 साल पहले ग्वालियर के महाराज माधवराव सिंधिया की मौत हो गई थी। इस विमान में हवा में उड़ते समय ही आग पकड़ ली थी, जो तेज बारिश में भी जलती रही। इस घटना में विमान में बैठे सभी लोगों के शव बुरी तरह झुलस गए थे। ऐसे में माधवराव के शव की पहचान उनके लॉकेट से हुई थी।

30 सितंबर को माधवराव सिंधिया की पुण्यतिथि है। इस मौके पर हम आपके लिए लाए हैं उनसे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां…

– माधवराव सिंधिया का निधन 30 सितंबर 2001 को उस समय हुआ था, जब वे दिल्ली से कानपुर एक रैली को संबोधित करने स्पेशल एयरक्राफ्ट से जा रहे थे। यूपी में मैनपुरी के भैंसरोली गांव के ऊपर एयरक्राफ्ट में आग लग गई।
– आग लगते ही एयरक्राफ्ट खेत में गिर गया। उस समय बारिश भी हो रही थी, लेकिन एयरक्राफ्ट का जलना जारी रहा। ग्रामीणों ने कीचड़ डाल आग बुझाई थी।

– एयरक्राफ्ट में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास किया तो एक भी आदमी जिंदा नहीं निकला। मरने वालों में माधवराव सिंधिया भी थे, लेकिन शव की पहचान करना मुश्किल था।
– उधर रैली स्थल पर एयरक्राफ्ट की लोकेशन ली जा रही थी, और माधवराव सिंधिया के बारे में पूछा जा रहा था। इसी बीच एयरक्राफ्ट दुर्घटना की खबर पहुंची।
– पुलिस अफसर दुर्घटना स्थल पहुंचे और जब एयरक्राफ्ट का दरवाजा तोड़ा गया तो सभी सीट बेल्ट से बंधे मिले। हादसा इतनी जल्दी हुआ कि लोगों को सीट बेल्ट खोलने तक का मौका नहीं मिला।
– बॉडीज की पहचान करना मुश्किल था। एक शव के गले में लॉकेट था, इस पर मां दुर्गा अंकित थीं। मालूम हुआ कि माधवराव इस लॉकेट को पहनते थे।

किताब में बताई असली वजह…

पीढ़ियों से सहेजकर रखा गया पन्ना रत्न का शिवलिंग यदि माधवराव सिंधिया के महल में होता तो उनकी विमान हादसे में मौत नहीं होती। यह रहस्य उनकी पत्नी माधवी राजे सिंधिया ने माधवराव के जीवन पर लिखी गई पुस्तक ‘A Life Madhav Rao Scindia’ के विमोचन के मौके पर कही थी।

और क्या लिखा है किताब में

 पन्ना (EMERALD) का यह शिवलिंग सिंधिया राजवंश के संस्थापक महादजी सिंधिया अपनी पगड़ी में पहनते थे। यह शिवलिंग उनके साथ हमेशा रहता था। महादजी सिंधिया की मौत के बाद यह शिवलिंग सिंधिया राजवंश के पूजाघर का हिस्सा बन गया और सदियों तक उसकी पूजा होती रही। 9 मार्च 2009 को जब माधवराव के जीवन पर लिखी गई पुस्तक A Life Madhav Rao Scindia का विमोचन दिल्ली में हुआ था। उस समय माधवी राजे ने बताया कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया की मौत के बाद उनकी बड़ी बेटी उषा राजे इस शिवलिंग को अपने साथ नेपाल ले गईं थीं।

माधवराव की बहन ले गई यह शिवलिंग

 माधवीराजे ने बताया कि महाराज माधवराव ने अपनी बहन ऊषा राजे से यह शिवलिंग मांगा भी, लेकिन वह नहीं मिला। यदि यह शिवलिंग महल के पूजा घर में रहता तो, शायद आज माधवराव सिंधिया जिंदा होते। उस समय महाराज माधवराव ने इस मुद्दे को ज्यादा तूल नहीं दिया।

राजमाता विजयाराजे ने बताया था इस रत्न के बारे में

 राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने भी इस पन्ना के शिवलिंग का जिक्र अपनी बायोग्राफी में किया है। 30 साल पहले इस पन्ने की कीमत करीब एक मिलियन पौंड से ज्यादा यानि करीब पांच करोड़ रुपए आंकी गई थी। आज की स्थिति में यह पन्ना रत्न बेशकीमती है, क्योंकि यह 350 साल से ज्यादा पुराना है। हालांकि सिंधिया राजवंश से जुड़ा कोई व्यक्ति इस शिवलिंग के बारे में बताने को तैयार नहीं है।