जब मां ने 21 साल की बेटी को प्रेग्नेंसी टेस्ट लेते पकड़ा, फिर हुआ कुछ ऐसा…

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शॉर्ट मूवी ‘द गुड गर्ल’ अभी  यू-ट्यूब पर रिलीज की गई है। यह मूवी 21 साल की लड़की अप्पू (प्लाबिता बोरठाकुर) और उसकी मां (गुरदीप कोहली) के बीच हुई उस बातचीत पर बेस्ड है। जो तब होती है, जब मां अचानक बेटी को प्रेग्नेंसी टेस्ट लेते पकड़ लेती है। इस पर मां कैसे रिएक्ट करती है?

आइये डालते हैं पूरी कहानी पर एक नजर…

– घर में अप्पू के लिए पार्टी की तैयारी चल रही है। बेटी वाशिंग एरिया में टेंशन में खड़ी हुई है। मां यह बड़बड़ाते हुए वहां एंटर होती है कि उसके पापा का दिमाग खराब हो गया है। पापा सुबह से एक्साइटेड हैं। शाम को पार्टी देना चाहते हैं। यह बताने के लिए कि उनकी प्यारी बेटी, उनकी गुड गर्ल उन्हीं के फील्ड (मार्केटिंग और सेल्स) में इंटर्नशिप कर रही है।
– वाशिंग मशीन में कपड़े डालते-डालते मां उस ओर बढ़ती है, जहां बेटी वाश बेसिन को छुपाए खड़ी है। हालांकि, वह कुछ छुपा नहीं पाती। मां की नजर बेसिन में पड़ी प्रेग्नेंसी टेस्ट स्ट्रिप पर पड़ जाती है और उसे झटका लगता है।

बेटी के मन में क्या उथल-पुथल चल रही है?

मां के स्ट्रिप देखते ही अप्पू एकदम डर जाती है। उसकी आंखों से आंसू बहने लगते हैं। वह सोच में पड़ जाती है। सोचती है कि मां अब सवाल करेगी कि और क्या करती हो? दारू पीती हो? ड्रग्स लेती हो? बाकी सब तो चल ही रहा है। और बचा ही क्या है? इसके बाद अप्पू सोचती है कि मां कहेगी कि बहुत सेल्फिश हो तुम। इन शरीफों की सोसाइटी में हम तो जीने लायक नहीं रहे? ऐसी बेटी के लिए पापा पार्टी देना चाहते हैं? उनकी गुड गर्ल। तुम्हारे पापा तुम्हारा मुंह तक नहीं देखना चाहते। निकल जाओ यहां से। अप्पू यह तक सोचने लगती है कि मां ने उसे थप्पड़ मारा।


जब अचानक आया बेटी के ब्वॉयफ्रेंड का मैसेज

स्ट्रिप्स देखने के बाद काफी देर तक रूम में सन्नाटा रहता है। इसी बीच बेटी के ब्वॉयफ्रेंड के कुछ मैसेज आते हैं, जो सिचुएशन के बारे में पूछ रहा है। मां उन मैसेजेस को पढ़ लेती है और बेटी सॉरी बोलती है। बेटी खेद जताते हुए कहती है कि वह अपने पेरेंट्स की गुड गर्ल नहीं बन सकी। खुद को संभाल नहीं सकी। मां बेटी से पूछती है कि क्या दोनों में से किसी ने शराब पी रखी थी? क्या बेटी के साथ जबरदस्ती की गई? लेकिन अप्पू ऐसी किसी भी बात से इनकार कर देती है। अप्पू बताती है कि वह उसका ब्वॉयफ्रेंड है। बेटी आगे कहती है कि मां ठीक बोलती थी कि उसे डिसीजन लेना नहीं आता। उसके डिसीजन हमेशा गलत होते हैं।

मां बेटी के करीब आती है। उसके कंधे पर हाथ रखती है और उसके आंसू पोंछकर कहती है, “मैं कहती तो थी बेटा, लेकिन मुझे भी पता नहीं कि क्या सही है और क्या गलत। एक लड़की भी जिंदगी में अपने डिसीजन ले सकती है? ये तो मुझे पता ही नहीं था। क्योंकि मुझे तो ये हक़ कभी मिला ही नहीं। आज शाम को पार्टी होनी है या नहीं होनी है? ये भी मुझसे पूछा नहीं जा रहा। एक्चुअली, ठीक है। इसमें तुम्हारी गलती भी नहीं है। गलती सारी मेरी है। मैंने ही गुड गर्ल बने रहने के लिए तुम पर इतना प्रेशर डाला कि तुम मुझसे आज बात करने से डरती हो।”
मां आगे कहती है, “अप्पू…जो हुआ, वह न होता तो बेहतर था।

जो हो गया है, वो हमारे हाथ में नहीं है। लेकिन इस सिचुएशन को डील कैसे करना है, वह हमारे हाथ में है।” इसके बाद मां बेटी से पूछती है कि क्या उसने यह डिसीजन एडल्ट होने के बाद लिया तो वह हामी में सिर हिला देती है। तब मां कहती है, “अप्पू…एडल्ट का मतलब यह नहीं कि तुम अपनी मनमर्जी करते रहो। एडल्ट का मतलब होता है कि कोई भी डिसीजन लेने के बाद उसके लिए जिम्मेदार रहो। तो ठीक है। शाम को तुम खुद अपने पापा को इस सिचुएशन के बारे में बताओगी…पार्टी से पहले। इसके बाद हम डॉक्टर के पास जाएंगे।”

बाद में बेटी मां से पूछती है कि क्या वह नाराज नहीं है तो जवाब मिलता है कि वो नाराज नहीं, गुस्से में लाल हो रही है। मां कहती है, “इसका मतलब भी जानती हो। लेकिन अब मैं तुम्हारा साथ नहीं दूंगी तो कौन देगा? हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे गुड गर्ल, गुड ब्वॉय बने रहें तो पेरेंट्स होने के बाते हमारी जिम्मेदारी भी तो है कि हम भी उनके लिए गुड बनें। सोसाइटी यह डिसाइड नहीं करेगी कि हम अपनी जिंदगी, अपना घर कैसे चलाएं। हम साथ-साथ हैं।” इसके बाद बेटी मां के गले लग जाती है।